जयप्रकाश पाराशर
नवंबर के ठिठुरते अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश की राजनीति का तापमान
चरम पर पहुंच गया है, जहां जाकर तर्क और अक्ल की बातें पिघलने लगी हैं। आरोपों और
प्रत्यारोपों की धुंध गहरी हो गई है। सभाएं कर-करके नेताओं के गले रुंध गए हैं,
पैरों में छाले पड़ गए हैं और स्नायुतंत्र एक मशीन की तरह भाषण उगल रहा है। प्रचार
बंद होने के पहले हर कोई अपना सारा ईंधन झोंक देना चाहता है। जब अलाव सुर्ख है, मध्य
प्रदेश के आकाश में हेलिकाप्टरों की गड़गड़ाहट और आवाजाही तेज से तेजतर हो गई है।
नरेंद्र मोदी सभाएं लेकर कांग्रेस और गांधी परिवार को ध्वस्त कर देना
चाहते हैं। कांग्रेस के भविष्य की खोज में लगा अनगढ़ राहुल गांधी विचारक की मुद्रा
में सभाएं लेकर मध्य प्रदेश के आदिवासियों और वंचित वर्ग को संदेश दे देना चाहता
है। धीरे से भाजपा की राजनीति में दरकिनार किए गए लालकृष्ण आडवाणी भी एक होशियार
बुजुर्ग की तरह अपनी प्रासंगिकता को खत्म नहीं होने देना चाहते। वह सभाएं ले रहे
हैं तो मुरली मनोहर जोशी को ब्राह्मण बहुल रीवा विंध्य क्षेत्र में भेजा जा रहा
है। हेमामालिनी बसंती के डायलाग सुना रही है और कॉमेडी शो से सीधे निकलकर नवजोत
सिद्दू सियासत के मंच पर महंगाई से परेशान अवाम को हंसाने आ गए हैं।
भाजपा का शिविर
छत्तीसगढ़ के चुनाव से थके डॉ. रमनसिंह मसाज कराने नहीं गए, वह मध्य
प्रदेश के समरांगण में उतर पड़े हैं। छत्तीसगढ़ से सटे इलाकों में वह सभाएं करने
लगे। हेमामालिनी आज भी श्योपुर में शोले के संवाद सुनाने वाली हैं। लंबे समय तक
दस्युग्रस्त रही भिंड और श्योपुर की जनता ‘शोले’ के संवादों पर तालियां पीटे तो किसी को आश्चर्य
नहीं।
भाजपा के वयोवृद्ध नेता आडवाणी का निशाना कांग्रेस पर होता है, अन्यथा
वह एक लोक इतिहासकार की तरह बताते हैं कि किस तरह एक समय मध्य प्रदेश में कुछ नहीं
था और शिवराज ने उसे क्या से क्या बना दिया है।
शिवराजसिंह चौहान सभाओं में कह रहे हैं कि इतनी सभाएं करने की ताकत उन्हें
भगवान दे रहे हैं। श्रोता हैरान हैं। चौहान अपने चुनाव क्षेत्र विदिशा में पत्नी
साधना सिंह और बुदनी में बेटे कार्तिकेय सिंह को जिम्मा सौंपकर रोजाना 7-10 सभाएं
कर रहे हैं। हेलिकाप्टर में खाना और मीडिया को साक्षात्कार साथ-साथ चल रहे हैं। देर
रात रणनीतियां बनाई जा रही हैं। पर्दे के पीछे लोग स्क्रिप्ट लिखने में व्यस्त
हैं।
सुषमा स्वराज विदिशा जिले में घूम रही हैं। उन्हें
2014 में अपने लोकसभा चुनाव की कांस्टीट्वेंसी भी तैयार करनी है। प्रदेशाध्यक्ष
नरेंद्र सिंह तोमर को ग्वालियर-चंबल का 34 सीटों का गढ़ बचाने की चिंता है। जहां
भाजपा को सबसे बड़ी चुनौती दरपेश है। तोमर ग्वालियर में भिंड और मुरैना की सभाएं कर
रहे हैं। मुरैना को लेकर वे इतने चिंतित हैं कि वहां सभाओं और जनसंपर्क का
व्यस्त कार्यक्रम है।
कांग्रेस का शिविर
कांग्रेस का शिविर क्षत्रपों के अलावा सोनिया गांधी और राहुल गांधी से
करिश्मे की उम्मीद करता है। सोनिया गांधी मध्य प्रदेश की सरकार को भ्रष्ट कह रही हैं और राहुल गांधी विकास के अर्थ बता रहे हैं।
प्रचार समिति के प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया हर सभा में पूछ रहे हैं कि क्या तुम्हारे यहां बिजली 24 घंटे आती है। माइक का मुंह जनता की ओर कर देते हैं। आवाज आती है- नहीं। माइक का मुंह फिर अपनी ओर कर लेते हैं।
कमलनाथ बता रहे हैं कि केंद्र ने कितना पैसा भेजा लेकिन राज्य सरकार कुछ नहीं कर पाई। उनके वर्चस्व के छिंदवाड़ा में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है।
कपिल सिब्बल एक कुशल वकील की तरह प्रेस कांफ्रेंस में जिरह कर रहे हैं
और शिवराज को चुनाव से पहले ही मुकदमा हरा देना चाहते हैं। उनकी राय है कि उनका
सरनेम चौहान होता तो उन्हें भी म.प्र. में कुछ प्लॉट मिल जाते। वे अब मोदी के बाद
शिवराज सिंह चौहान को विकास पर बहस की चुनौती दे रहे हैं, जब उनकी चुनौती ग्रहण
करने का वक्त अरुण जेटली के पास भी नहीं। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह
हुड्डा अपने राज्य में बड़ी रैली करने के बाद स्टार प्रचारक हो गए हैं।
संघर्ष अब उबल रहा है। ये बिगुल-ढोल-नगाड़े अचानक खामोश हो जाएंगे, तब
अवाम के पास सोचने का वक्त होगा कि इनमें सबसे कम बुरा कौन है, जिसे वे 25 नवंबर
को चुन सके।