गुरुवार, 11 अगस्त 2016

मालवा-निमाड़ को अलग राज्य क्यों बनाएं?

जयप्रकाश पाराशर 

छोटे राज्यों के गठन के बाद जहां भी स्वप्नदर्शी नेता मिले, जिनके पास दृष्टि थी, उन राज्यों का तेजी से विकास हुआ। यदि 2000 के बाद ही देखें तो उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ का तेजी से विकास हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि मध्य प्रदेश और बिहार की प्रगति दर भी बढ़ी। मालवा-निमाड़ को एक अलग राज्य बनाए जाने के पक्ष में ऐसे  पर्याप्त तर्क हैं, जो इस क्षेत्र की कायापलट कर देंगे और शेष मध्य प्रदेश को भी इसका बड़ा फायदा होगा। 

 मान लेते हैं कि मालवा-निमाड़ के प्रस्तावित राज्य का नाम अवंति प्रदेश है। जिसमें देवास, धार, इंदौर, उज्जैन, आगर मालवा, झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, बुरहानपुर,शाजापुर, नीमच, और राजगढ़ जिले का कुछ भाग शामिल हो सकते हैं। सीहोर जिले का भी कुछ भाग इसमें शामिल हो सकता है। करीब 80-90 विधानसभा क्षेत्र होंगे। 
सवांल यह है कि अवंति प्रदेश ही क्यों? और मालवा क्यों नहीं?
एक, यह राज्य चंद्रगुप्त विक्रमादित्य और सम्राट अशोक के समय से अवंति कहलाता रहा है। मराठाओं और हैहय राजाओं के दौर में भी इसे अवंति कहा जाता रहा है। 
दो, अवंति प्रदेश होने के बाद यह देश में राज्यों की सूची में अल्फाबेटिकली पांचवें स्थान पर दिखाई देगा।  
तीन, मालवा का क्षेत्र राजस्थान में भी है और पंजाब में भी मालवा क्षेत्र है। नाम के किसी भी भ्रम से बचा जा सकेगा। यदि आप केवल मालवा नाम रखेंगे तो निमाड़ की पहचान का क्या होगा? 

क्यों जरूरत 

  1. एक अध्ययन के मुताबिक दो से तीन करोड़ जनसंख्या वाले राज्य बेहतर तरीके से प्रबंधित और प्रशासित किए जा सकते हैं। ऐसे राज्यों की  व्यवहार्यता (वाएबिलिटी) और टिकाऊपन (सस्टेनेब्लिटी) अपेक्षाकृत बेहतर होता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य धीमे विकास की समस्या से जूझ रहे हैं। मध्य प्रदेश की जनसंख्या अभी 7.33 करोड़ (2012 के मुताबिक) है। इस लिहाज से अवंति प्रदेश की जनसंख्या करीब 1.8 से 2.25 करोड़ (अनुमानित) होगी। प्रबंधन के लिहाज से यह जनसंख्या एक अच्छा आंकड़ा है। 
  2. मध्य प्रदेश को भी इसका लाभ मिलेगा। तब उसके पास करीब 5 करोड़ जनसंख्या होगी, जिसका प्रबंधन और प्रशासन आसानी से किया जा सकेगा। ज्यादा फोकस्ड नीतियां बनाई जा सकती हैं और उनका बेहतर क्रियान्वयन किया जा सकता है। माॉनिटरिंग में सुधार आएगा। माइक्रो लेवल की नीतियां बनाने और क्रियान्वयन करने में छोटे राज्य काफी मदद करते हैं। 
  3. अवंति प्रदेश मालवा के पठार पर बसा समशीतोष्ण जलवायु वाला इलाका है। इसकी अपनी कृषि प्रणाली है जो जलवायु के मुताबिक है। वह अपनी नीतियां उसके मुताबिक बना सकेगा। 
  4. इसकी सीमाएं गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से जुड़ी हैं। गुजरात और महाराष्ट्र दोनों ही औद्योगिक रूप से उन्नत राज्य हैं। इन राज्यों के साथ सीधे फ्रेट कारीडोर का निर्माण किया जा सकेगा। मालवा-निमाड़ तब मैन्युफैक्चरिंग व वेयरहाउसिंग का हब बन सकता है। 
  5. हर राज्य को एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान मिला है। जो भोपाल में खुला है। यदि अवंति प्रदेश बनता है तो एक एम्स उसे भी मिलेगा, जो इंदौर-देवास-उज्जैन के बीच कहीं खोला जा सकेगा, ताकि मालवा-निमाड़ के लोगों को फायदा मिल सके। 
  6. नई राजधानी का निर्माण करना होगा। इसमें करीब 5000-6000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। यदि यह इंदौर-देवास के बीच कहीं बनाई जाए तो एक महानगर का जन्म होगा। जो अहमदाबाद व मुंबई के साथ लिंकेज के कारण बड़ा औद्योगिक केंद्र बन सकता है। टीसीएस और इंफोसिस अपने इंदौर में केंद्र खोल रहे हैं, इस लिहाज से इस लिंकेज का बड़ा फायदा उठाया जा सकता है। 
  7. मक्सी-देवास-सांवेर-पीथमपुर को बड़े औद्योगिक कारीडोर के रूप में विकसित किया जा सकता है। 
  8. प्रत्येक राज्य में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी खोली गई है, जो अभी भोपाल में है, अवंति प्रदेश को भी इसी तरह एक एनएलयू मिलेगा और उस राज्य का अपना एक हाईकोर्ट होगा। लिहाजा रोजगार और सुविधा दोनों की दृष्टि से यह काफी फायदेमंद साबित होगा। अभी मंदसौर के आदमी को जबलपुर तक जाना पड़ता है। न्याय मिलना भी एक तरह का अन्याय ही हो जाता है। 
  9. भोपाल को भी यह लाभ मिलेगा कि उसे एक आईआईएम और आईआईटी मिल जाएंगे, जो अभी इंदौर में है। वहीं इंदौर को ट्रिपल आईटी मिल सकेगा। जो अभी ग्वालियर में है। 
  10. इंदौर गारमेंट उद्योग का बड़ा केंद्र है। यदि उसे यहां एक नेशनल फैशन इंस्टीट्यूट (निफ्ट) मिल जाता है तो इस उद्योग को बड़ी मदद मिलेगी और छात्रों को भी अॉन द जॉब ट्रेनिंग के अवसर मिलेंगे। इंदौर बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं, आईटी व सॉफ्टवेयर, कारपोरेट गवर्नेंस, गारमेंट व अन्य उद्योगों में अॉन द जॉब ट्रेनिंग के लिए आदर्श जगह है। इंडो-जर्मन टूल रूम वहां है। दूसरी तरफ उज्जैन, महेश्वर और ओंकारेश्वर विश्व पर्यटन के नक्शे पर हैं। 
  11. अंत में नेताओं को भी बड़ा फायदा होगा। मालवा-निमाड़ के कैबिनेट में कम से कम 11-12 मंत्री होंगे। जो अभी दो-तीन से ज्यादा नहीं हो सकते। नए प्रदेश के अपने मंडल व निगम होंगे। 
  12. प्रशासनिक व्यवस्था काफी चुस्त दुरुस्त हो जाएगी। नए जिलों का निर्माण किया जा सकेगा। अभी बड़े-बड़े जिलों के कारण आम आदमी को काफी परेशानी हो रही है। कुरावर के आदमी को राजगढ़ जाना पड़ता है और आष्टा के आदमी को शाजापुर जाना पड़ता है। इसे तर्कसम्मत बनाया जा सकेगा। जिसे लोगों तक सरकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाए जा सकें और राजस्व विभाग से परेशान किसानों की समस्याएं हल की जा सकें। 
  13. धार और झाबुआ जिले के आदिवासियों का विकास तेज गति से किया जा सकेगा। 





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