जयप्रकाश पाराशर
मध्य प्रदेश में भाजपा को 165 सीटों का जबर्दस्त समर्थन वास्तव में जन आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति है। यह विकास की राह पर चल पड़े उनींदे राज्य की जनता की उम्मीदों का सैलाब है। शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री के रूप में कई चुनौतियों से निपटना होगा, तभी वह इतने सारे लोगों की उम्मीदों पर खरे उतर सकेंगे। अगर वह ऐसा कर पाए तो मोदी से आगे निकल जाएंगे क्योंकि यह एक पिछड़े राज्य का कायांतरण होगा।
कारगर प्रशासन
(डिलीवरी सिस्टम) व भ्रष्टाचार
शिवराज सिंह चौहान जब मुख्यमंत्री के रूप में काम
संभालेंगे तब उनके सामने एक चुनौती वही होगी जिससे वे पिछले दस साल से मुकाबला कर
रहे हैं। अब तक वे ऐसी चुस्त-दुरुस्त प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बना पाए हैं, जैसी
गुजरात में नरेंद्र मोदी बना पाए हैं। उनकी योजनाओ का लाभ तभी तक लोगों तक पहुंच
पाएगा, जब वे एक कारगर प्रशासनिक व्यवस्था बना लेंगे। जब तक डिलीवरी सिस्टम को
भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं बनाया जाएगा, योजनाओं और व्यय के वास्तविक नतीजे या
लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकेंगे।
अपराध व कानून व
व्यवस्था
राज्य में 2008 से 2013 के बीच 15 हजार से ज्यादा
बलात्कार हुए हैं। हत्याओं और अन्य अपराधों के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। शिवराज
सिंह चौहान को एक ऐसा सक्षम पुलिस प्रशासन बनाना होगा, जो राजनीतिक हस्तक्षेप से
मुक्त हो। धोखाधड़ी, चोरी, आर्थिक अपराधों की कायमी कराना ही मुश्किल है।
औद्योगिक विकास व निवेश
पिछले वर्षों में निवेशकों के कई सम्मेलन आयोजित
करने के बावजूद शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने में ज्यादा
सफलता नहीं मिली है। अब उन्हें लघु व मझौले उद्योगों की श्रृंखला खड़ी करनी होगी।
मध्य प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के विस्तार के बगैर ज्यादा संख्या में
रोजगार पैदा करना संभव नहीं होगा। मध्य प्रदेश में ज्यादातर उद्योगों के लिए बिजली का कनेक्शन लेने और बिजली से उद्योग चलाना काफी महंगा विकल्प है, क्योंकि सारा खर्च उद्योग को ही वहन करना पड़ता है। इसलिए जनरेटर से चलने वाले उद्योगों की संख्या काफी ज्यादा है। छोटे-मझौले उद्योगों के लिए बिजली की लागत में कमी करनी चाहिए।
कुपोषण व शिशु
मृत्युदर
मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय विकास दर से भी ज्यादा
बेहतर विकास दर प्रदर्शित की। करीब 11 फीसदी की विकास दर होने के बाद भी मध्य
प्रदेश में पांच साल तक के बच्चों की शिशुमृत्यु दर देश में सबसे ज्यादा थी। जननी
सुरक्षा और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं के बावजूद यहां माताओं की मौते हुईं। लड़कियों
को अनुपात कम हुआ। मानव सूचकांकों में सुधार करना शिवराज सिंह की सबसे बड़ी चुनौती
है।
गुणवत्ता
मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा हो या निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हों या निजी मेडिकल कॉलेज, बिजली हो
या सड़कें हों, उद्योग हों या सेवाएं सब जगह गुणवत्ता चिंता का विषय है। अब हर चीज
की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। गुणात्मक बदलाव
लाए बिना वास्तविक नतीजे हासिल नहीं किए जा सकेंगे और न ही सामाजिक बदलाव लाए जा सकेंगे। कौशल का विकास
कई योजनाएं हैं जो कौशल विकास के लिए काम कर रही हैं लेकिन उसके नतीजे नहीं आए हैं। उसका प्रमुख कारण यह है कि औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर ही ज्यादा विकसित नहीं हो पाए। प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों के प्लेसमेंट के आंकड़े भी संदिग्ध हैं। कौशल विकास के लिए सरकार को पहले से स्थापित कंपनियों और नामी प्रशिक्षण संस्थानों या वोकेशनल इंस्टीट्यूट के माध्यम से ही नौजवानों के कौशल उन्नयन पर ज्यादा काम करना चाहिए। कई पालिटेक्निक और आईटीआई के पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है।
बुनियादी ढांचे का विकास
प्रदेश में बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए सड़कों के लिए कोई एकीकृत एजेंसी बनानी चाहिए जो अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके नगरपालिका की सड़कों से लेकर स्टेट हाईवेज तक की सड़कों तक का विकास करे। अभी सड़क निर्माण में जो अलग अलग एजेंसियां काम कर रही हैं, वह गुणवत्ता के लिहाज से सही व्यवस्था नहीं है। सड़कों, स्कूल भवन, स्वास्थ्य केंद्रों और तालाबों व छोटे बांधों के निर्माण पर सरकार को ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बिजली उत्पादन को इतना बढ़ाया जाना चाहिए कि उद्योगों की आवश्यकता पूरी की जा सके और उनकी ऊर्जा की लागत को कम किया जा सके और किसानों को उन दो-तीन महीनों में पर्य़ाप्त बिजली मिल सके, जब उन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
गांवों का विकास
ग्रामीण विकास के नाम पर बड़े प्रावधानों और व्ययों के बाद भी गांवों की हालत खराब है। पंचायतों की सड़कों नालियों आदि में कोई ज्यादा खर्च नहीं हुआ है। गांवों के लिए एक इंटीग्रेटेड प्लान बनाना चाहिए। जिसमें निश्चित जनसंख्या के हिसाब से गांवों में सड़कें, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और अच्छे स्कूलों का विकास किया जाए। गांवों में रोजगार के कृषि से इतर अवसर जब तक विकसित नहीं कर दिए जाएंगे, तब तक गांवों की माली हालत नहीं सुधरेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए डेयरी फार्मिंग, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, फल व सब्जियों की खेती को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने के अलावा बाजार तक माल की पहुंच की ऐसी व्यवस्था चाहिए जो लाभ का बड़ा हिस्सा उत्पादक को दिला सके।